i-pill के बारे में पूरी जानकारी।

असुरक्षित यौन संबंध या गर्भनिरोधक असफलता के बाद अनचाही गर्भावस्था को रोकने के लिए i-pill एक आपातकालीन गोली है जो पिंक कलर में आती है।

i-pill

i-pill का उपयोग कब करें ?

असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बाद गर्भावस्था को रोकने के लिए i-pill को असुरक्षित यौन संबंध के 12 घण्टे के अंदर और 72 घण्टे के बाद में नहीं लेना है। i-pill गर्भनिरोधक विफलता, असुरक्षित यौन संबंध, बलपूर्वक यौन संबंध या नियमित जन्म नियंत्रण विधि में उपयोग आती है।

i-pill कैसे काम करती है ?

एक उपजाऊ अंडे (fertilized egg) के गर्भ में संलग्न होने के बाद ही गर्भावस्था स्थापित होती है। आपके मासिक धर्म चक्र के दिन के आधार पर, i-pill या तो एक अंडे को अंडाशय से निकलने से रोक सकती है या यदि अंडा पहले से ही निकल चुका है, तो यह शुक्राणु को उपजने से रोक सकती है। यदि गर्भावस्था पहले से ही स्थापित हो चुकी है तो i-pill काम नहीं करेगी। i-pill भ्रूण (fetus) को हानि नहीं पहुंचाती है।

i-pill कितनी कारगर है ?

असुरक्षित यौन संबंध के 24 घण्टे के अंदर लेने पर i-pill की प्रभावशीलता 95%, 25-48 घण्टों के अंदर 85 % और 49-72 घण्टों के अंदर 58% होती है। यदि मासिक धर्म एक हफ्ते से अधिक देरी से हो रहा है तो कृपया गर्भावस्था के लिए जाँच जरूर करे।

क्या i-pill लेना सुरक्षित है ?

i-pill के दूरगामी दुष्प्रभाव नहीं हैं और यह सुरक्षित है। ये वैज्ञानिक और नियामक संस्थाओं द्वारा सत्यापित है।

i-pill के साइड इफेक्ट्स –

i-pill के दूरगामी गंभीर दुष्प्रभाव तो नहीं हैं लेकिन इसे लेने के बाद सामान्य साइड इफेक्ट्स होते हैं जैसे –

  • जी मचलना।
  • उल्टी और सर दर्द।
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द।
  • स्तनों का सामान्य से अधिक कोमल महसूस होना।
  • योनि में ज्यादा रक्तस्राव हो सकता है।

i-pill का उपयोग कितनी बार कर सकते हैं ?

ये एक आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली है। एक मासिक धर्म चक्र के भीतर चक्र की गड़बड़ी की संभावना के कारण बार-बार देना उचित नहीं है। नियमित गर्भनिरोधक जैसे कंडोम, नियमित जन्म नियंत्रण की गोलियों का निरंतर उयोग सुनिश्चित करें। अपने नियमित जन्म नियंत्रण तरीके को i-pill से ना बदलें।

क्या i-pill गर्भपात की गोली है ?

नहीं। i-pill में हॉरमोन होते हैं जो अण्डोत्सर्जन (ovulation) में देरी करते हैं या अंडे की ओर शुक्राणु के गमन (migration) को रोकते हैं जिससे निषेचन (fertilization) और गर्भावस्था को रोक जा सकता है। यह पहले से ही निषेचित अंडे पर प्रभावी नहीं है। गर्भपात की गोलियों में ऐसी दवाएं होती हैं जो गर्भावस्था के विकास को रोकती हैं और गर्भाशय के स्वरूप को भी बदल देती हैं जिससे उपजाऊ अंडा अलग होकर गर्भपात हो सकता है।

i-pill कैसे लें ?

i-pill की सिर्फ 1 गोली मुँह के रास्ते ,खाने के साथ लें तो बेहतर।

शराब पीना कैसे छोड़े ?

शराब पीना काफी हद तक एक सामाजिक गतिविधि और तनाव से निपटने के तरीके के रूप में स्वीकार किया जाता है। ये अनिद्रा या चिंता के लिए भी एक उपाय हो सकता है ।

फिर भी, शराब आमतौर पर इन चिंताओं को लंबे समय तक दूर करने के लिए बहुत कुछ नहीं करती है। यह कुछ महत्वपूर्ण डाउनसाइड्स के साथ भी आता है।

जैसे, आपको आश्चर्य हो सकता है कि क्या यह ब्रेक का समय है। और तुम अकेले नहीं हो। अधिक से अधिक लोग अपने जीवन में शराब की भूमिका को करीब से देख रहे हैं।

शराब के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव –

शराब आपके स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित कर सकती है।यहां तक कि कम मात्रा में पीने से भी आपको घबराहट, धूमिल या भूख का अहसास हो सकता है। जितना अधिक आप पीते हैं, उतनी ही अधिक संभावना है कि आप अन्य स्वास्थ्य प्रभावों को भी नोटिस करते हैं, जैसे:

  • बार-बार नींद का टूटना।
  • पाचन संबंधी समस्याएं।
  • याददाश्त की समस्या।
  • बढ़ी हुई चिंता, अवसाद और चिड़चिड़ापन।
  • प्रियजनों के साथ असहमति और अन्य संघर्ष।

कॉड लिवर ऑयल मछली का तेल क्या है ?

कॉड लिवर ऑयल के कैप्सूल

कॉड लिवर ऑयल एक आहार पूरक (dietary supplement) है जो कॉड मछली (गडीडे) के लीवर से मिलता है। इसमें विटामिन- ए और विटामिन- डी की भरपूर मात्रा होती है। ज्यादातर मछली के तेलों से ज्यादा भरपूर मात्रा में ओमेगा- 3 फैटी एसिड जैसे डीएचए और ईपीए भी होते हैं।

कॉड लिवर ऑयल के फ़ायदे –

  • ये खून को आसानी से थक्का जमने से रोकता है।
  • ये दर्द और सूजन को कम करता है।
  • डिप्रेशन को कम करने में अच्छा काम करता है।
  • त्वचा की चमक बनाये रखता है।
  • त्वचा को इन्फेक्शन से दूर रखता है।
  • दिल की बीमारी को सही करने में अन्य दवाओं के साथ दिया जा सकता है।

कॉड लिवर ऑयल के नुकसान –

  • इसमें विटामिन- ए (रेटिनॉल) अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है। विटामिन- ए का संचय लिवर में होने के कारण ये खतरनाक स्तर में पहुँच जाता है जिससे हाइपरविटामिनोसिस- ए होता है।

विटामिन ई क्या है ?

विटामिन- ई वसा में घुलने वाले 8 पदार्थों का ऐसा मिश्रण है जिसमें 4 टोकोफेरोल ओर 4 टोकोत्रियनॉल होते हैं।

विटामिन- ई कब खोजा गया ?

विटामिन- ई को 1922 में कैथरीन स्कॉट बिशप और हर्बर्ट मैक्लीन इवान्स ने खोजा था।

विटामिन- ई के लाभ –

  • आपकी कोशिकाओं को पोषण देता है: विटामिन- ई, विशेष रूप से आपकी कोशिकाओं को पोषण देने के लिए उपयोग किया जाता है, ताकि आप बाहर से तरोताज़ा महसूस करें।
  • ये एक सिद्ध एंटीऑक्सीडेंट है, जो आपकी कोशिकाओं को अच्छे स्वास्थ्य में रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे आपको मांसपेशियों, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य का लाभ मिलता है।

विटामिन- ई का त्वचा में कैसे लगाते हैं ?

विटामिन- ई के कैप्सूल को फोड़कर सीधे ही अपने स्किन में लगा सकते हैं, या एलोवेरा के ससथ मिक्स कर के भी लगा सकते हैं ।

विटामिन- ई कब लगायें ?

विटामिन- ई को लगाने का सबसे सही समय रात को होता है।

क्या विटामिन- ई से चेहरे की झुर्रियां सही होती हैं ?

चेहरे के ग्लो और झुर्रियों को हटाने में विटामिन- ई का प्रयोग किया जाता है। इसे फेसवॉश के साथ भी उपयोग कर सकते हैं।

क्या विटामिन- ई के कैप्सूल को खा सकते हैं?

जी हाँ बिल्कुल खा सकते हैं। एक वयस्क प्रतिदिन 3 से 15 mg विटामिन- ई खा सकता है। इसके इस्तेमाल से बॉडी का मेटाबोलिज़्म सही रहता है।

क्या विटामिन- ई को बालों में लगा सकते हैं ?

ये बालों के रूखेपन को दूर कर चमक बढ़ाता है। इसे बालों में रात को एलोवेरा या हेयर ऑयल के साथ मिलाकर अच्छे से मसाज़ करनी चाहिए। विटामिन- ई बालों को झड़ने से भी रोकता है।

विटामिन- ई कहाँ मिलेगा ?

विटामिन- ई OTC केटेगरी की दवा है यानी बिना पर्ची के किसी भी मेडिकल स्टोर में मिल जाती है।

क्या विटामिन- ई को रोज़ ले सकते हैं ?

विटामिन- ई को खाने के लिए रोज एक कैप्सूल ले सकते हैं या अपने डॉक्टर की सलाहनुसार।

विटामिन- ई के नुकसान –

विटामिन- ई के ज्यादा नुकसान तभी होते हैं जब उसे ज्यादा मात्रा में लिया जाये जैसे सरदर्द, उल्टी का मन ,कमजोरी,थकान, आंखों से धुंधला दिखना, पेट दर्द।

यूनिएंजाइम टैबलेट के बारे में पूरी जानकारी। ALL ABOUT UNIENZYME TABLET.

यूनिएंजाइम टैबलेट विभिन्न डाईजेस्टिव एंजाइम का कॉम्बिनेशन है। यूनिएंजाइम टैबलेट एक प्रकार से आहार पूरक (dietary supplement) है जो भोजन को पेट में तोड़कर उसे अच्छे से पचाने का काम करता है। पेट की सूजन, अपच, गैस या किसी भी प्रकार की परेशानी को ठीक करने के काम आता है। यूनिएंजाइम टैबलेट प्रोबियोटिक्स का काम भी करता है यह आंतों द्वारा भोजन के पोषक तत्वों को सोखने में मदद भी करता है।

यूनिएंजाइम की पैकिंग –

  • यूनिएंजाइम टैबलेट 15 गोली की पैकिंग में आता है।
  • यूनिएंजाइम सिरप फॉर्म में भी आता है।
  • छोटे बच्चों के लिए ड्रॉप में भी आता है।

यूनिएंजाइम टैबलेट के मुख्य तत्व –

  1. फंगल डाईस्टेज
  2. पपेन
  3. एक्टिवेटेड चारकोल।

** एंजाइम क्या है? – एंजाइम एक प्रकार का जैव उत्प्रेरक होता है जो जैव रासायनिक क्रियाओं को बढ़ा देते हैं।

यूनिएंजाइम टैबलेट के मुख्य लाभ/उपयोग –

  • एक प्राकृतिक प्रो-पाचन एंजाइम के रूप में कार्य करता है जो भोजन के पाचन में मदद करता है।
  • पाचन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को सरल यौगिकों में तोड़ने में मदद करता है।
  • भोजन से पोषक तत्वों के अवशोषण (absorption) में मदद करता है।
  • इसमें पपैन (पपीते से निकाला गया एंजाइम) होता है जो पेट में प्रोटीन को तोड़ने में मदद करता है।
  • इसमें चारकोल होता है जिसमें एक अवशोषित गुण होता है जो पेट में अवांछित पदार्थों और विषाक्त पदार्थों को बांधने और उन्हें शरीर से बाहर निकालने में सहायक होता है।

यूनिएंजाइम टैबलेट के नुकसान –

वैसे तो ये एक सप्लीमेंट है जिसे सही तरीके से लेने में कोई नुकसान नहीं होता लेकिन इसे अधिक मात्रा में लेने से पेट संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे-

  • पेट में दर्द
  • जी मचलना
  • कब्ज
  • यूरिन करने में दर्द
  • काला मल
  • गैस्ट्रिक समस्या

यूनिएंजाइम टैबलेट लेने से यदि कोई समस्या आ रही हो तो तुरन्त अपने डॉक्टर की सलाह लें।

यूनिएंजाइम टैबलेट कैसे लेनी है?

वयस्क – दिन में एक बार भोजन के बाद या डॉक्टर की सलाहनुसार यूनिएंजाइम टैबलेट की 1 गोली ले सकते हैं। यदि आपका डॉक्टर प्रति दिन 1 से अधिक गोली निर्धारित करता है ,तो अपने डॉक्टर की सलाहनुसार चलें क्योंकि यह आपकी स्तिथि की गंभीरता पर आधारित हो सकता है।

क्या गर्भवती महिलाएं यूनिएंजाइम टैबलेट ले सकती हैं ?

यदि आप गर्भवती हैं, गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं, या स्तनपान करा रही हैं, तो इस दवा को लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

क्या यूनिएंजाइम टैबलेट प्रोबियोटिक है ?

यह एक से अधिक पाचन एंजाइमों, प्रोबायोटिक्स-प्रीबायोटिक्स और इम्युनोबायोटिक्स से भरपूर आहार पूरक (dietary supplements) है। यह पाचन प्रक्रिया को बढ़ाकर और साथ ही मूल तत्वों को संतुलित करके उचित पाचन को बढ़ावा देता है। यह अपच, सूजन, गैस या पेट की किसी भी परेशानी के मामले में दिया जाता है।

क्या यूनिएंजाइम टैबलेट लेना अच्छा है ?

अच्छे स्वास्थ्य और शरीर के संपूर्ण पोषण संतुलन में सुधार के लिए पाचन एंजाइम आवश्यक हैं। ये सप्लीमेंट न केवल पाचन में सहायता करते हैं बल्कि आपके शरीर को आपके द्वारा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में भी मदद करते हैं। ये पाचन विकारों, पोषण संबंधी कमियों और खाद्य असहिष्णुता से पीड़ित लोगों के लिए सबसे अच्छा काम करते हैं।

निकोटैक्स के बारे में पूरी जानकारी।

निकोटैक्स क्या है ?

निकोटैक्स एक निकोटिन युक्त गम है जो धूम्रपान करने वाले/ तंबाकू और गुटका खाने वाले लोगों की इस आदत को छुड़ाने में मदद करता है, यह WHO द्वारा जारी “निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी” (एन आर टी) के प्रमाणित सिद्धान्त पर काम करता है।

Nicotex 4mg strip

निकोटिन क्या है ?

निकोटिन एक प्रकार का केमिकल है जो तंबाकू की पत्तियों में होता है। जब आप धूम्रपान करते हैं या तंबाकू चबाते हैं तो निकोटिन आपके रक्त में अवशोषित होकर मस्तिष्क में पहुँच जाता है। यह मस्तिष्क के उस हिस्से को सक्रिय कर देता है, जो आपको शान्ति और आनन्द की अनुभूति दिलाता है। कुछ देर बाद जब शरीर में निकोटिन का स्तर गिरता है, तो इस आनन्द का एहसास भी कम होने लगता है और आपका शरीर फिर से अगली सिगरेट या तंबाकू मांगने लगता है। इस तरह आपको धूम्रपान या तंबाकू चबाने की आदत पड़ जाती है।

निकोटैक्स कैसे काम करता है ?

निकोटैक्स का हर टुकड़ा आपको वही निकोटीन उपलब्ध कराता है जो आपको सिगरेट या तंबाकू चबाने से मिलता है। इसमें सिगरेट/तंबाकू की तुलना में काम निकोटिन होता है। ये धीरे-धीरे आपके शरीर को कम निकोटिन की आदत डलवाता है, इस तरह धीरे-धीरे सिगरेट/तंबाकू की आदत छोड़ने में आपकी मदद करता है।

निकोटैक्स का कब इस्तेमाल करें ?

धूम्रपान/तंबाकू चबाने और तंबाकू युक्त गुटका की आदत छोड़ते समय होने वाली निकोटिन की तलब सहित, विडड्रॉल सिम्पटम्स को कम करने के लिए इस्तेमाल करें।

निकोटैक्स की सही मात्रा क्या है ?

निकोटैक्स दो मात्राओं में उपलब्ध है – 2mg और 4 mg.

  • 2 mg ऐसे लोगों के लिए सही है, जो दिन में 20 या इससे काम सिगरेट पीते हैं।
  • 4 mg ऐसे लोगों के लिए सही है, जो दिन में 20 से ज्यादा सिगरेट पीते हैं।

निकोटैक्स की पैकिंग –

  • निकोटैक्स 2mg 9 गम की स्ट्रिप और 25 गम के टिन के डिब्बे में आती है ।
  • निकोटैक्स 4 mg भी 9 गम की स्ट्रिप और 25 गम के टिन के डिब्बे में आती है ।
  • निकोटैक्स ट्रांसडर्मल पैच (खाल के ऊपर लगने वाला पैच जिससे निकोटिन शरीर के अंदर अपने आप चला जाता है) 7mg,14mg और 21mg के पैच आते हैं।

निकोटैक्स लेने का तरीका –

4 mg डॉक्टर की सलाहनुसार।

2 mg दिन में 8 से 12 गम। दिनभर में 24 गम से ज्यादा इस्तेमाल न करें।

निकोटैक्स लेने का चार्ट।
निकोटैक्स गम चबाने का तरीका।

निकोटैक्स के नुकसान –

निकोटैक्स गम अधिक मात्रा में लेने से सरदर्द, पेटदर्द, सुस्ती और दस्त हो सकते हैं।

निकोटैक्स कब नहीं लेना चाहिए ?

  • जब आप ऐसी दवा ले रहे हों जिसमें थियोफ़ायलीन, टेकराइन, क्लोज़ापाइन या रोपीनिरोल हो या धूम्रपान को रोकने वाली नॉन-निकोटिन दवा।
  • जब आपको पूर्व में गम या निकोटिन युक्त उत्पादों से किसी प्रकार की एलर्जी हुई हो।
  • जब आपको ऐसी बीमारी हो जैसे अनियंत्रित उच्च ब्लड प्रेशर, लकवा, पेट में अल्सर, गुर्दों या लिवर की बीमारी, हृदय या रक्त संचार संबंधी समस्या, डायबिटीज़, गले में तीव्र खराश, मुँह में सूजन आदि।
  • यदि आप गर्भवती हैं या शिशु को स्तनपान कराती हों।

निकोटैक्स का इस्तेमाल ना करें –

  • यदि आप तंबाकू का इस्तेमाल न करते हों।
  • यदि आपकी उम्र 18 वर्ष से कम हो।

निकोटैक्स का टोल फ्री नंबर- 1800 1212 000

बिकोस्यूल्स क्या है? WHAT IS BECOSULES?

BECOSULES कैप्सूल फॉर्म में थायमिन, राइबोफ्लेविन, पाइरिडोक्सिन, विटामिन बी 12, नियासिनामाइड, कैल्शियम पैंटोथेनेट, फोलिक एसिड, बायोटिन, एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी) का कॉम्बिनेशन है ।

BECOSULES CAPSULE

BECOSULES के उपयोग और फायदे –

विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स और विटामिन सी की कमी वाले रोगियों के उपचार में BECOSULES का उपयोग किया जाता है। ऐसे रोगियों में शामिल हैं:

  • एनोरेक्सिया (एक तरह का आहार सम्बन्धी विकार) , मधुमेह (diabetes mellitus), मोटापा और शराब के आदी मरीजों जिन्हें संतुलित आहार नहीं मिल पाता ।
  • रोगाणुरोधी दवाओं (antibiotics) को देने से पेट के गुड बैक्टीरिया और विटामिन्स की कमी हो जाती है जिसमें इस कैप्सूल को दे सकते हैं।
  • लंबे समय तक दस्त में और पुरानी गैस्ट्रो-आंत्र विकारों में इस कैप्सूल को दे सकते हैं।
  • बुख़ार, तीव्र या पुराना संक्रमण, सर्जरी, जलन और फ्रैक्चर आदि के कारण मेटाबोलिज्म रेट बढ़ता है जिससे विटामिन्स की जरूरत भी बढ़ती है।
  • गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी में दिया जा सकता है।
  • शरीर में मुक्त कणों (free radicals) से लड़ने में मदद करता है और इन मुक्त कणों से होने वाले नुकसान को कम करता है।
  • एक पोषण पूरक (nutritional suppliments) के रूप में कार्य करता है और शरीर में सभी पोषक तत्वों के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है जिसे हम अपने दैनिक आहार सेवन में शामिल करने से चूक सकते हैं।
  • त्वचा की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह शरीर को कोलेजन का उत्पादन करने और ऊतकों (tissue) की मरम्मत करने में मदद करता है।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली (immunity system) को बढ़ाता है और विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स विभिन्न संक्रमणों से लड़ने में मदद करते हैं।
  • ऊर्जा उत्पादन के लिए संग्रहीत कार्बोहाइड्रेट के उपयोग में सहायता करता है और कैल्शियम पैंटोथेनेट के कारण रक्त वाहिका के संरक्षण के लिए भी मदद करता है।

BECOSULES कैसे लेना है?

हमेशा BECOSULES को ठीक वैसे ही लें जैसे आपके डॉक्टर ने आपको बताया है।

BECOSULES के नुकसान –

BECOSULES के सामान्यतः तो कोई नुकसान नहीं नज़र आते क्योंकि शरीर उतना ही विटामिन सोखता है जितना उसे जरूरत हो बाकी यूरिन के रास्ते बाहर चला जाता है।

यदि किसी को BECOSULES लेने के बाद कुछ लक्षण दिखते हैं तो तुरन्त अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

BECOSULES किस समय लेना चाहिए?

BECOSULES सुबह लें तो अच्छा रहेगा क्योंकि दिनभर की शारीरिक ऊर्जा को बनाये रखता है बाकी अपने डॉक्टर के सलाहनुसार चलें।

BECOSULES को 1 दिन में कितना लें?

BECOSULES सामान्यतः तो रोज की 1 कैप्सूल ही काफी रहती है लेकिन जरूरत के हिसाब से डॉक्टर इसकी मात्रा बढ़ा सकते हैं।

BECOSULES का कुल्ला भी होता है क्या?

BECOSULES को मुंह, जीभ, अंदरूनी मुँह के छाले के लिए कई लोग इसके कैप्सूल को खोलकर इसके अंदर के पाउडर को थोड़े से पानी में घोलकर कुल्ला भी करते हैं।

BECOSULES कौन ले सकता है?

BECOSULES कैप्सूल को सामान्यतः 12 साल से बड़ी उम्र के सभी लोगों को दिया जा सकता है। छोटी उम्र के लिए BECOSULES सिरप दे सकते हैं। मात्रा डॉक्टर की सलाहनुसार।

BECOSULES कहाँ मिलेगा?

किसी भी मेडिकल स्टोर में आसानी से मिल जाता है।

BECOSULES किस कंपनी का आता है?

फाइजर लिमिटेड।

BECOSULES कैप्सूल की पैकिंग –

BECOSULES के 1 पत्ते में 20 कैप्सूल आते हैं।

BECOSULES Z क्या है ?

इसमें बी-काम्प्लेक्स के साथ जिंक भी होता है और ये भी कैप्सूल की पैकिंग में आता है।

मंकीपॉक्स वायरस क्या है? WHAT IS MONKEYPOX VIRUS?

Monkeypox

मंकीपॉक्स वायरस जानवरों से मनुष्यों में प्रसारित होने वाला वायरस है (viral zoonosis), जिसमें लक्षण चेचक (smallpox) जैसे होते हैं लेकिन ये चेचक से कम खतरनाक होता है। इसे पहली बार 1958 में बन्दरों में और 1970 में मनुष्यों में खोजा गया था। 1980 में चेचक के उन्मूलन और बाद में चेचक की समाप्ति के बाद मंकीपॉक्स वायरस जन स्वास्थ्य के लिए चैलेंज बन कर उभरा है। मंकीपॉक्स वायरस मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों के निकट पाया जाता है और अब शहरी क्षेत्रों में तेजी से दिखाई देने लगा है।

माना जाता है कि संक्रमण का प्राथमिक मार्ग संक्रमित जानवर या उसके शारीरिक तरल पदार्थों के सम्पर्क में आना है।

मंकीपॉक्स का वायरस क्या है? –

मंकीपॉक्स वायरस एक डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए वायरस है जो पॉक्सविरिडे (Poxviridae) परिवार के ऑर्थोपॉक्सवायरस (Orthopoxvirus) जीनस से संबंधित है। मंकीपॉक्स वायरस के दो अलग-अलग आनुवंशिक समूह हैं: मध्य अफ्रीकी (कांगो बेसिन) क्लैड और पश्चिम अफ्रीकी क्लैड। कांगो बेसिन क्लैड ने ऐतिहासिक रूप से अधिक गंभीर बीमारी का कारण बना है और इसे अधिक संक्रामक माना जाता था। दोनों समूहों के बीच का भौगोलिक विभाजन अब तक कैमरून में ही रहा है, कैमरून एकमात्र ऐसा देश है जहां दोनों वायरस के समूह पाए गए हैं।

मंकीपॉक्स वायरस कहाँ से आया ?

विभिन्न जानवरों की प्रजातियों की पहचान मंकीपॉक्स वायरस के लिए अतिसंवेदनशील के रूप में की गई है। इसमें रस्सी गिलहरी (rope squirrels), पेड़ गिलहरी(tree squirrels), गैम्बियन पाउच वाले चूहे, डॉर्मिस चूहे, और अन्य प्रजातियां शामिल हैं। मंकीपॉक्स वायरस के प्राकृतिक इतिहास पर अनिश्चितता बनी हुई है और सटीक जलाशयों की पहचान करने के लिए और प्रकृति में वायरस के संचलन को कैसे बनाए रखा जाता है, इसके लिए आगे के अध्ययन की आवश्यकता है।

मंकीपॉक्स वायरस का प्रकोप –

मानव में मंकीपॉक्स वायरस की पहचान पहली बार 1970 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में 9 महीने के एक लड़के में हुई थी, जहां 1968 में चेचक को समाप्त कर दिया गया था। तब से, अधिकांश मामले ग्रामीण, वर्षावन क्षेत्रों से सामने आए हैं। कांगो बेसिन, विशेष रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में और मानव में मंकीपॉक्स वायरस के मामले पूरे मध्य और पश्चिम अफ्रीका से तेजी से सामने आए हैं।

मंकीपॉक्स वायरस वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व की बीमारी है क्योंकि यह न केवल पश्चिम और मध्य अफ्रीका के देशों को प्रभावित करती है, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों को भी प्रभावित करती है। 2003 में, अफ्रीका के बाहर पहला मंकीपॉक्स का प्रकोप संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था और इसे संक्रमित पालतू प्रैरी कुत्तों के संपर्क से जोड़ा गया था। इन पालतू जानवरों को गैम्बियन पाउच वाले चूहों और डॉर्मिस के साथ रखा गया था जिन्हें घाना से देश में आयात किया गया था। इस प्रकोप के कारण यूएस मंकीपॉक्स के 70 से अधिक मामले सितंबर 2018 में नाइजीरिया से इज़राइल जाने वाले यात्रियों में सितंबर 2018, दिसंबर 2019, मई 2021 और मई 2022 में यूनाइटेड किंगडम में, मई 2019 में सिंगापुर में रिपोर्ट किए गए हैं और जुलाई और नवंबर 2021 में संयुक्त राज्य अमेरिका में। मई 2022 में, कई गैर-स्थानिक देशों में मंकीपॉक्स के कई मामलों की पहचान की गई थी।  

मंकीपॉक्स वायरस कैसे फैलता है ?

पशु-से-मानव (zoonotic) डायरेक्ट खून का किसी भी प्रकार का सम्पर्क, शारीरिक तरल पदार्थ, या संक्रमित जानवरों के त्वचीय या श्लेष्म घावों के सीधे संपर्क से हो सकता है।अफ्रीका में, रस्सी गिलहरी, पेड़ गिलहरी, गैम्बियन शिकार चूहों, बंदरों की विभिन्न प्रजातियों और अन्य कई जानवरों में मंकीपॉक्स वायरस संक्रमण के सबूत पाए गए हैं। मंकीपॉक्स वायरस के प्राकृतिक स्त्रोत की अभी तक पहचान नहीं की गई है, हालांकि चूहों की सबसे अधिक संभावना है। अपर्याप्त रूप से पका हुआ मांस और संक्रमित जानवरों के अन्य पशु उत्पादों का सेवन एक संभावित जोखिम कारण है। 

मंकीपॉक्स वायरस के लक्षण –

मंकीपॉक्स वायरस के शरीर के अंदर घुसने से लेकर उसके लक्षण दिखाई देने तक का समय 6 से लेकर 13 दिन तक का रहता है और कभी कभी 5 से 21 दिन तक रहता है। शुरुआती 5 दिनों के लक्षण-

  • बुखार, सरदर्द, लिम्फ नोड्स की सूजन, पीठ दर्द, मसल में दर्द, कमजोरी।

शुरुआती बुखार के 1-3 दिनों के लक्षण-

  • त्वचा का फटना, दानें पूरे शरीर के बजाय चेहरे और हाथ-पैरों में ज्यादा दिखाई देते हैं।
  • चेहरे पर दानें 95% हिस्से में देखने को मिलता है।
  • हाथ की हथेली और पैर के तलवे में दानें 75% ।
  • मुँह के अंदर 75%।
  • जननांग 30%।
  • आँखों में 20% हिस्से को कवर करते हैं।

मंकीपॉक्स वायरस में बनने वाले दानों के क्रम को हम इस प्रकार समझ सकते हैं –

दानें मैक्यूल्स/macules (एक सपाट आधार वाले घाव) से पैप्यूल्स/papules (थोड़ा उभरे हुए हार्ड घाव), वेसिकल्स/vesicles (स्पष्ट तरल पदार्थ से भरे घाव), पस्ट्यूल/pustules (पीले रंग के तरल पदार्थ से भरे घाव), और क्रस्ट/crust जो सूख कर गिर जाते हैं, से क्रमिक रूप से विकसित होते हैं। घावों की संख्या कुछ से कई हजार तक अलग-अलग हो सकती है।

मंकीपॉक्स वायरस को कैसे पहचानें? DIAGNOSIS OF MONKEYPOX VIRUS.

मंकीपॉक्स, चिकेनपॉक्स, स्मॉलपॉक्स, स्कैबिज़, मीजल्स, सिफलिस, त्वचा के बैक्टीरियल इन्फेक्शन नाम की बीमारियां दिखने में एक जैसी होती हैं जिन्हें क्लीनिकल टेस्ट के माध्यम से ही पहचाना जा सकता है। मंकीपॉक्स की शुरुआती समय में लिम्फ नोड्स का फूलना (lymphadenopathy) भी एक बड़ा अंतर हो सकता है।

Example Of Lymphadenopathy
  • यदि मंकीपॉक्स की संभावना लग रही है तो स्वास्थ्य कर्मियों को एक सैंपल एकत्र करना चाहिए और इसे उचित क्षमता वाली प्रयोगशाला में सुरक्षित रूप से पहुँचाना चाहिए।
  • मंकीपॉक्स की पुष्टि सैंपल के प्रकार और गुणवत्ता और प्रयोगशाला परीक्षण के प्रकार पर निर्भर करती है। 
  • पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (PCR) इसकी सटीकता और संवेदनशीलता को देखते हुए सबसे सही प्रयोगशाला परीक्षण है।
  • मंकीपॉक्स के लिए सैंपल त्वचा के घावों से लेने होते हैं – वेसिकल्स और पस्ट्यूल की परत या तरल पदार्थ, और सूखी पपड़ी। जहां संभव हो, बायोप्सी भी एक विकल्प है।
  • घाव के नमूनों को एक सूखी, साफ ट्यूब (बिना वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया वाली ट्यूब) में संग्रहित किया जाना चाहिए और ठंडा रखा जाना चाहिए।
  • परीक्षण के परिणामों की व्याख्या करने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि रोगी की जानकारी नमूनों के साथ प्रदान की जाए: a) बुखार की शुरुआत की तारीख, b) दाने की शुरुआत की तारीख, c) सैंपल लेने की तारीख, d) व्यक्ति की वर्तमान स्थिति (दाने का चरण), और e) उम्र।

मंकीपॉक्स वायरस को कैसे रोकें?

टीकाकरण VACCINATION –

चेचक के लिये जो वैक्सीन बनाई गई थी उस के अध्ययन से ये पता चला की ये वैक्सीन मंकीपॉक्स को रोकने में लगभग 85% कारगर थी इसलिए जिसे पूर्व में चेचक की वैक्सीन लगाई थी उनपर मंकीपॉक्स का ज्यादा असर नहीं हुआ।

वर्तमान में मूल (पहली पीढ़ी) की चेचक वैक्सीन आम जन के लिए उपलब्ध नहीं है। 2019 में मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए संशोधित एटेन्युएटेड वैक्सीनिया वायरस (अंकारा स्ट्रेन) पर आधारित एक नए टीके को मंजूरी दी गई थी। यह दो खुराक वाला टीका है जिसकी उपलब्धता सीमित है।

मानव से मानव संचरण (transmission) को होने से रोकना –

मंकीपॉक्स वायरस की रोकथाम के लिए निगरानी और नए मामलों की तेजी से पहचान बहुत जरूरी है। मानव मंकीपॉक्स के प्रकोप के दौरान, संक्रमित व्यक्तियों के साथ निकट संपर्क मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारण है। स्वास्थ्य कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों को संक्रमण का अधिक खतरा है।

संदिग्ध या कन्फर्म मंकीपॉक्स वायरस संक्रमण वाले रोगियों की देखभाल करने वाले या उनके सैंपल लेने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर मानक संक्रमण नियंत्रण सावधानियों (standard infection control precautions) को लागू करना चाहिए। यदि संभव हो तो, रोगी की देखभाल करने वाले को पहले से चेचक की वैक्सीन लगी हो, का चयन किया जाना चाहिए।

जानवर से मनुष्य संचरण (transmission) को होने से रोकना –

ज्यादातर यही देखा गया है कि मनुष्यों में मंकीपॉक्स वायरस जानवरों के संपर्क में आने से अधिक हुआ है। जंगली जानवरों से किसी भी प्रकार के संपर्क से बचना चाहिए, विशेषकर ऐसे जंगली जानवर जो बीमार या मृत हैं ।

पशु व्यापार को प्रतिबंधित कर के –

कुछ देशों ने जंगली जानवरों जैसे चूहे, बंदर आदि जानवरों को व्यापार के लिए प्रतिबंधित किया हुआ है। लेकिन कई ऐसे देश भी हैं जहां ये खुलेआम बेचे जाते हैं उनका मांस आदि खाने के उपयोग में लाया जाता है । यही सबसे बड़ा कारण मंकीपॉक्स जैसे वायरस का इंसानों में फैलना है।

दशमूलारिष्ट टॉनिक क्या है?

वैद्यनाथ दशमूलारिष्ट
डाबर दशमूलारिष्ट

दशमूलारिष्ट एक आयुर्वेदिक टॉनिक है जो कई कंपनियों द्वारा मार्केट में उपलब्ध हैं और सभी एक ही फॉर्मूले पर आधारित हैं। इसलिए आप कोई भी दशमूलारिष्ट ले सकते हैं। दशमूलारिष्ट टॉनिक परिवार के सभी जनों को दी जा सकती है। ये टॉनिक मुख्य रुप से दिन प्रतिदिन की सुस्ती, सामान्य कमजोरी, थकान से उबरने के लिए एक पोषण टॉनिक है।दशमूलारिष्ट टॉनिक खराब पाचन में सुधार करता है और सभी प्रकार के संक्रमण (इंफेक्शन) के खिलाफ प्रतिरक्षा (immunity) को बढ़ाता है। दशमूलारिष्ट टॉनिक में 5 से 7 प्रतिशत तक अल्कोहॉल (सेल्फ जनरेटिंग अल्कोहॉल) की मात्रा होती है।

दशमूलारिष्ट टॉनिक के फायदे –

दशमूलारिष्ट टॉनिक महिलाओ के लिए बहुत गुणकारी मानी जाती है। दशमूलारिष्ट हमारे शरीर के बहुत से विकारो को दूर करती है और हमारे शरीर में नई सी जान देती है। दशमूलारिष्ट टॉनिक के महत्वपूर्ण लाभ एवं प्रयोग निम्नलिखित हैं:

प्रसूता स्त्रियों के लिए दशमूलारिष्ट के लाभ –

दशमूलारिष्ट टॉनिक में प्रयोग किए गए तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमताओं को बढ़ाती है। जब कोई स्त्री शिशु को जन्म देने के बाद दशमूलारिष्ट का सेवन करती है तो वह कई रोगों का शिकार होने से बच जाती है। क्योंकि इसमें उपयोग किए गए तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इसका सेवन आम का पाचन करता है जिस से ज्वर, जीर्णज्वर, आम सम्बंधित बीमारियां नहीं होती है (पाचनतंत्र दुरुस्त न होने से भोजन अधपचा रह जाता है जिसे ‘आम’ कहते हैं), यह प्रसूता के कास और श्वास में भी काफी लाभदायक है। इसमें उपयुक्त तत्व शरीर में प्रसव के बाद आने वाली निर्बलता को दूर करते हैं।

गर्भपात और गर्भस्राव होने में में दशमूलारिष्ट टॉनिक का उपयोग –

स्त्रियों में गर्भाशय की शिथिलता गर्भपात अथवा गर्भस्त्राव का कारण बनता है। गर्भाशय की शिथिलता को दूर करने के लिए दशमूलारिष्ट टॉनिक एक उतकृष्ट औषधि है। इस औषधि में जिन तत्वों का उपयोग होता है वह स्त्री के गर्भाशय को ताकत देते हैं। यह बार-बार होने वाले गर्भस्त्राव का इलाज करता है साथ ही एक स्वस्थ संतान की प्राप्ति भी होती है। यदि किसी भी स्त्री को ऐसी कोई भी समस्या है तो इस औषधि का प्रयोग कम से कम 3 महीने तक करना चाहिए। साथ ही संतान प्राप्ति के प्रयास भी करते रहने चाहिए।

पूयशुक्र बीमारी (pus cells in semen) में दशमूलारिष्ट टॉनिक का उपयोग –

दशमूलारिष्ट टॉनिक एक ऐसी औषधि है जिसमें शुक्र शोधक पाया जाता है। इस औषधि का उपयोग रौप्य भस्म और त्रिफला चूर्ण के साथ सेवन करने से शुक्रशुद्धि होती है। साथ ही वीर्य (स्पर्म) में आ रही पस सेल्स को भी कम करता है।

दर्द निवारक (painkiller) और शोथहर (anti inflammatory) में दशमूलारिष्ट टॉनिक का उपयोग –

दशमूलारिष्ट टॉनिक के सेवन से वात का शमन होता है। इसमें कुछ तत्व ऐसे होते हैं जो दर्द निवारक होते हैं। इसी कारण इस औषधि का उपयोग दर्द से निवारण करने में होता है। यह स्त्रियों में होने वाली पीठ दर्द, गर्भाशय के दर्द, और पेट के दर्द का उपचार करने में सहायक होती है।

पाचन क्रिया को सुधारने में दशमूलारिष्ट टॉनिक के उपयोग –

दशमूलारिष्ट टॉनिक का सेवन करने से शरीर की पाचन क्रिया पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। यदि आपका पाचन तंत्र सही नहीं है तो ऐसे में यह शरीर को कई बीमारियों के लिए न्यौता देता है और बीमारियों का घर बन जाता है। ऐसे में दशमूलारिष्ट टॉनिक का उपयोग करने से पाचन तंत्र सही रहता है जिससे आप कई बीमारियों का शिकार होने से बच सकते हैं।

अन्य उपयोग –

  • शारीरिक-मानसिक रूप से मजबूत बनाने में दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
  • बढ़ती उम्र को रोकन में दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
  • स्टेमिना बढ़ाने में दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
  • त्वचा के लिए दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
  • श्वास रोग में दशमूलारिष्ट के उपयोग ।

दशमूलारिष्ट टॉनिक का सेवन और मात्रा विधि।

बच्चे- 5 से 10 ml

वयस्क- 10 से 25 ml

सेवन-

दवा लेने का उचित समय- सुबह और रात में भोजन के बाद

दिन में कितनी बार लें? 2 बार

किसके साथ लें? बराबर मात्रा में गुनगुना पानी मिला कर

कितने समय के लिए लें?चिकित्सक की सलाह से।

पेट साफ कैसे हो?

दोस्तों आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब्ज या पेट साफ न होना हर उम्र के लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और इससे अनेक प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं।

कब्ज क्या है? What is Constipation?

कब्ज डाईजेस्टिव सिस्टम (पाचन तंत्र) की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति का मल बहुत हार्ड हो जाता है और उसे मलत्याग में दिक्कत आ रही हो। कब्ज में मलनिष्कासन की मात्रा बहुत कम हो जाती है, मल टाइट हो जाता है और उसे निकालने में जोर लगाना पड़ता है।

कब्ज होने के कारण –

  • शरीर में पानी की कमी होना।
  • सही समय पर भोजन ना करना।
  • व्यायाम ना करना, एक ही जगह बैठे काम करना, कम चलना।
  • चाय,कॉफी,शराब और धूम्रपान करना।
  • रेशेदार भोजन काम करना या ना करना।
  • कुछ खास दवाओं को लेना।
  • भोजन बहुत ही कम करना।
  • थाइरॉइड हॉर्मोन का कम बनना।
  • ज्यादा व्रत रखना।
  • जल्दबाज़ी में भोजन करना।
  • ऐसा भोजन जो पचने में बहुत टाइम लगाये, का सेवन करना।
  • आंत, लिवर की बीमारी का होना।

कब्ज का घरेलू ईलाज-

  • पानी खूब पीना।
  • रेशेदार भोजन लेना जैसे- साबुत अनाज, भिंडी।
  • ताजे फल और सब्जियां लेना।
  • रोजाना व्यायाम और चलना चाहिए।
  • फैटी या वसा युक्त भोजन ना करना या बहुत कम करना।

पेट साफ रखने के आयुर्वेदिक उपाय –

*ज्यादा समस्या होने पर अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  1. नमक – छोटी हरड़ और काला नमक समान मात्रा में मि‍लाकर पीस लें। रोज रात को इसकी दो चाय की चम्‍मच गर्म पानी से लेने से दस्‍त साफ आता हैं।
  2. ईसबगोल – दो चाय चम्‍मच ईसबगोल 6 घण्‍टे पानी में भि‍गोकर इतनी ही मि‍श्री मि‍लाकर जल से लेने से दस्‍त साफ आता हैं। केवल मि‍श्री और ईसबगोल मि‍ला कर बि‍ना भि‍गोये भी ले सकते हैं।
  3. चना – कब्‍ज वालों के लि‍ए चना उपकारी है। इसे भि‍गो कर खाना अच्छा होता है। यदि‍ भीगा हुआ चना न पचे तो चने उबालकर नमक अदरक मि‍लाकर खाना चाहि‍ए। चने के आटे की रोटी खाने से कब्‍ज दूर होती है। यह पौष्टिक भी है। केवल चने के आटे की रोटी अच्‍छी नहीं लगे तो गेहूं और चने मि‍लाकर रोटी बनाकर खाना भी लाभदायक है। एक या दो मुटठी चने रात को भि‍गो दें। सुबह जीरा और सौंठ पीसकर चनों पर डालकर खायें। घण्‍टे भर बाद चने भि‍गोये गये पानी को भी पी लें। इससे कब्‍ज दूर होगी।
  4. बेल – पका हुआ बेल का गूदा पानी में मसल कर मि‍लाकर शर्बत बनाकर पीना कब्‍ज के लि‍ए बहुत लाभदायक हैं। यह आँतों का सारा मल बाहर नि‍काल देता है।
  5. नीबू – नीबू का रस गर्म पानी के साथ रात्रि‍ में लेने से दस्‍त खुलकर आता हैं। नीबू का रस और शक्‍कर प्रत्‍येक 12 ग्राम एक गि‍लास पानी में मि‍लाकर रात को पीने से कुछ ही दि‍नों में पुरानी से पुरानी कब्‍ज दूर हो जाती है।
  6. नारंगी – सुबह नाश्‍ते में नारंगी का रस कई दि‍न तक पीते रहने से मल प्राकृति‍क रूप से आने लगता है। यह पाचन शक्‍ति‍ बढ़ाती हैं।
  7. मेथी – मेथी के पत्‍तों की सब्‍जी खाने से कब्‍ज दूर हो जाती है।
  8. गेहूँ – गेहूँ के पौधों (गेहूँ के जवारे) का रस लेने से कब्‍ज नहीं रहती है।
  9. सौंफ – सोते समय आधा चम्‍मच पि‍सी हुई सौंफ की फंकी गर्म पानी से लेने से कब्‍ज दूर होती है।
  10. दालचीनी – सोंठ, इलायची जरा सी मि‍ला कर खाते रहने से लाभ होता है।
  11. टमाटर कब्‍जी दूर करने के लि‍ए अचूक दवा का काम करता है। अमाश्‍य आँतों में जमा मल पदार्थ नि‍कालने में और अंगों को चेतनता प्रदान करने में बडी मदद करता है। शरीर के अन्‍दरूनी अवयवों को स्‍फूर्ति‍ देता है।

पेट साफ रखने के अन्य उपाय –

1) इसबगोल की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ 2-3 चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।

2) नींबू कब्ज में गुणकारी है। मामूली गरम जल में एक नींबू निचोड़कर दिन में 2-3 बार पियें। जरूर लाभ होगा।

3) एक गिलास दूध में 1-2 चम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज रोग का समाधान होता है।

4) एक कप गरम जल में १ चम्म्च शहद मिलाकर पीने से कब्ज मिटती है। यह मिश्रण दिन में 3 बार पीना हितकर है।

5) जल्दी सुबह उठकर एक लिटर मामूली गरम पानी पीकर 2-3 किलोमीटर घूमने जाएं। कब्ज का बेहतरीन उपचार है।

6) दो सेब प्रतिदिन खाने से कब्ज में लाभ होता है।

7) अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन में किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विर्सजित होता है।

8) अंगूर में कब्ज निवारण के गुण हैं। सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में 3 घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार में अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।

9) अलसी के बीज का मिक्सर में पावडर बनालें। एक गिलास पानी में 20 ग्राम के करीब यह पावडर डालें और 3-4 घन्टे तक गलने के बाद छानकर यह पानी पी जाएं। बेहद उपकारी ईलाज है। अलसी में प्रचुर ओमेगा फ़ेटी एसिड्स होते हैं जो कब्ज निवारण में महती भूमिका निभाते हैं।

10) पालक का रस या पालक कच्चा खाने से कब्ज नाश होता है। एक गिलास पालक का रस रोज पीना उत्तम है। पुरानी से पुरानी कब्ज भी इस सरल उपचार से मिट जाती है।

11) अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। 3-4 अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलायें सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।

12) बड़ी मुनक्का पेट के लिए बहुत लाभप्रद होती है। मुनका में कब्ज नष्ट करने के तत्व हैं। 7 नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है। एक तरीका ये हैं कि मुनक्का को दूध में उबालें कि दूध आधा रह जाए । गुन गुना दूध सोने के आधे घंटे पहले सेवन करें। मुनक्का में पर्याप्त आयरन होता है और दूध में आयरन नहीं होता है इसलिए दूध में मुनक्का डालकर पीया जाए तो आयरन की भी पूर्ती हो जाती है।

पेट साफ की एलोपैथी दवायें –

1) बिसाकोडिल – ये टेबलेट और सपोजिट्री फॉर्म में उपलब्ध होती हैं।

2) फिनॉफ्थलीन टेबलेट

3) लैकटूलोज़ लिक्विड

4) सोडियम पिकोसलफेट

5) मैग्नीशियम साइट्रेट आदि

**एलोपैथी दवाओं का सेवन बिना डॉक्टर के सलाह के बिल्कुल ना करें।

Design a site like this with WordPress.com
Get started