Glucon-D किस काम आता है?

Glucon-D ग्लूकोज़ पाउडर है जो तत्काल ऊर्जा प्राप्त करने के काम आता है। इसे 1933 में लॉन्च किया गया था। फिलहाल Glucon-D को जायडस वैलनेस (zydus wellness) कंपनी ओन करती है।

Glucon-D की पैकिंग –

75 ग्राम से 1 किलो तक। 1 किलो वाली पैकिंग प्लास्टिक जार और कार्टन (रिफिल पैक) में आती है।

Glucon-D के फ्लेवर –

Glucon-D रेगुलर जो हरे रंग की पैकिंग में आता है उसका कोई फ्लेवर नहीं होता है बाकी Glucon-D नींबू पानी और टैंगी ऑरेंज में भी आता है।

Glucon-D की मुख्य सामग्री –

Glucon-D रेगुलर में और फ्लेवर वाले में कुछ अंतर होता है तो सबसे पहले बात Glucon-D रेगुलर की करते हैं जो हरे रंग की पैकिंग में आता है।

डेक्सट्रोज (ग्लूकोज़)- 99.4%, मिनरल्स (कैल्शियम फॉस्फेट) और विटामिन डी2।

Glucon-D नींबू पानी और टैंगी ऑरेंज की मुख्य सामग्री –

सुक्रोज- 56%, ग्लूकोज़-40%,मिनरल्स (कैल्शियम फोस्फेट) और विटामिन सी।

**Glucon-D रेगुलर में और फ्लेवर वाले में विटामिन सी और विटामिन डी का फर्क होता है।

Nutritional value of Glucon-D regular
Nutritional value of Glucon-D tangy orange

Glucon-D कैसे लेना है?

4 चम्मच Glucon-D पाउडर को 1 गिलास पानी में मिलाकर।

Direction for use of Glucon-D

Glucon-D के फायदे –

  • इसमें मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत करता है।
  • विटामिन सी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
  • गर्मियों में शरीर से ग्लूकोज़ और पानी की कमी को भी दूर करता है।
  • तुरन्त ऊर्जा का अच्छा स्त्रोत है।
  • मानसिक सतर्कता बढ़ाता है।
  • व्यायाम या जिम में कसरत करने से जो मांसपेशियों में नुकसान होता है उसकी रिकवरी करता है।

Glucon-D के नुकसान –

Glucon-D के ज्यादा इस्तेमाल से पेट दर्द, मधुमेह, इंजेक्शन की जगह संक्रमण, मूत्र मार्ग में जलन, मचलाहट अवसाद की समस्या हो सकती है ।

अगर आप शुगर के मरीज है और आप लगातार इसका सेवन कर रहे हैं तो आपकी शुगर बढ़ सकती है। इसके अधिक सेवन से अनियमित दिल की धड़कन, हाइपरोसमोलर सिंड्रोम आदि होने की समस्‍या भी हो सकती है।

Glucon-D कस्टमर केयर –

ईमेल- customercare@zyduswellness.com

टोल फ्री नंबर- 1800-120-6868

Condom के बारे में पूरी जानकारी।

***ये टॉपिक इन्फॉर्मेशन के लिए है इसे अन्यथा ना लें।

Condom क्या है?

Condom रबड़ या लैटेक्स का बना पतला आवरण है जिसे गर्भ रोकने के लिए यूज़ किया जाता है। वैसे तो बाज़ार में 2 प्रकार के condom मिलते हैं एक जिसे पुरुषों द्वारा यूज़ किया जाता है और एक जिसे महिलाओं द्वारा यूज़ किया जाता है। लेकिन आज हम पुरुषों वाले कंडोम (external condom या male condom) की बात करते हैं।

दोस्तों वैसे तो ये टॉपिक हमारे समाज के हिसाब से बड़ा सेंसेटिव है लेकिन condom भी तो ये ही समाज यूज़ करता है इसलिए इस पर खुल कर बात भी होनी चाहिए।

दोस्तों कॉन्डोम का साइज और शेप पुरुषों के लिंग के साइज और शेप का होता है जिस से उसे पहनने में आसानी हो। दोस्तों आजकल मार्केट में कई कंपनियां इन्हें नए-नए फ्लेवर, कलर, डॉटेड आदि प्रकार के कॉन्डोम ला रही है। कॉन्डोम 1 पीस की पैकिंग से लेकर 20 पीस की पैकिंग तक उपलब्ध हैं।

Condom का यूज़ क्या है?

कॉन्डोम का यूज़ पुरुष के शुक्राणुओं को महिला के गर्भाशय में जाने से रोकने के लिए होता है जिससे गर्भ धारण रोका जा सके।

कॉन्डोम के इस्तेमाल से कई यौन संचारित बीमारियों (sexual transmitted disease जैसे HIV, AIDS) जो गंभीर होती हैं उन्हें दूर करने में मदद मिलती है।

Condom इस्तेमाल कैसे करें?

1: हर बार यौन संबंध बनाने के लिए एक नए और अच्छी गुणवत्ता वाले कॉन्डोम का उपयोग करें।

2: उपयोग से पहले एक्सपायरी डेट और कॉन्डोम के पैकेट हल्के से दबा कर देखें कि उसमें हवा है या नहीं, हवा है तो मतलब कॉन्डोम सही है।

3: कॉन्डोम को इसके पैकेट से निकालें। कैंची का उपयोग न करें और ध्यान रखें कि इसे बाहर खींचते समय यह फटे नहीं।

4: जननांग से किसी भी तरह के संपर्क से पहले कॉन्डोम को लिंग पर लगाएं।

5: सावधानी के साथ, हवा को निकालने के लिए कॉन्डोम को टिप से पकड़ें। इससे स्खलन के बाद वीर्य के संग्रह के लिए स्पेस बन जायेगा ।

6: तने लिंग पर एक हाथ से कॉन्डोम लगाएं। दूसरे हाथ से तने लिंग की जड़ तक इसे नीचे की तरफ खोलते जाएं।

7: केवल पानी आधारित चिकनाई का उपयोग करें, जैसे कि जेली। तेल आधारित चिकनाई, जैसे कि बेबी ऑयल, वैसलीन से कॉन्डोम फट सकता है।

8: स्खलन के बाद और लिंग के नरम होने से पहले, कॉन्डोम के सिरे को पकड़ें और सावधानी से निकालें। निकालने के दौरान कॉन्डोम का सिरा पकड़ें और ध्यान रखें कि वीर्य बिखरे नहीं।

9: इस्तेमाल किए गए कॉन्डोम को ठीक से निपटाएं।

10: यदि यौन संबंध बनाने के दौरान कॉन्डोम फट जाता है या फिसल जाता है, तो आपको जल्द से जल्द आपातकालीन गर्भनिरोधक (पोस्टकोइटल गर्भनिरोधक) के लिए चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए।

*Art By- Victor Martins

Condom के बारे में अन्य बातें –

आजकल कॉन्डोम के बाहरी आवरण पर उभरे हुए डॉट या बिना डॉट के कॉन्डोम भी आते हैं जिन्हें पैकेट के पीछे बने चित्र देख कर आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि उसमें डॉट किस प्रकार के हैं या वो बिना डॉट का है या उसका डिज़ाइन कैसा है।

कॉन्डोम के पैकेट के बाहर उसके फ्लेवर और लुब्रीकेंट की भी जानकारी होती है तो आप उसे भी अपने मनचाहे फ्लेवर में ले सकते हैं। कॉन्डोम एक बार में एक से ज्यादा ना यूज़ करें। मतलब दो एकसाथ नहीं लगाने हैं। कॉन्डोम यूज़ एंड थ्रो होते हैं इसलिए दोबारा इस्तेमाल ना करें।

कॉन्डोम के साइड इफ़ेक्ट –

  • कॉन्डोम के लुब्रीकेंट से किसी-किसी को खुजली या जलन हो सकती है, ऐसी स्थिति में अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
  • कॉन्डोम के रबड़ से भी किसी-किसी खुजली या जलन हो सकती ऐसे में पॉलीयुरेथीन से बने कॉन्डोम इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • कॉन्डोम उंगली के नाखून, अंगूठियां और तीखी चीजों द्वारा आसानी से फट जाता है।

भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा भी फ्री में ‘निरोध’ नाम से कॉन्डोम बाटें जाते हैं साथ ही साथ स्कूलों में बच्चों को कॉन्डोम के बारे में सारी जानकारी दी जाती है।

http://naco.gov.in/condom-promotion

https://health.uk.gov.in/pages/display/105-national-aids-control-programme

भूख कैसे बढ़ाएं?

आपकी भूख दो हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित की जाती है जिसमें एक ग्रहलीन (Ghrelin) है जिससे आपको लगता है कि आप भूखे हैं और दूसरा है लेप्टिन (leptin) जो आपके दिमाग को बताता है कि अब आपका पेट भर गया है। ये हॉर्मोन कभी भी किसी कारण से अनियंत्रित हो सकते हैं लेकिन फिर भी आप इन केमिकल्स को बैलेंस कर सकते हैं। अगर आपके हॉर्मोन ठीक हैं या आपको ठीक से भूख लग रही है तो भी आप कई ट्रिक से अपनी डाइट बढ़ा सकते हैं। एक बात का विशेष ध्यान रखिये की यदि लंबे समय से आपको भूख नहीं लग रही है और आप किसी बीमारी की अवस्था में हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह लीजिए।

भूख ना लगने के कारण-

भूख न लगना किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। आपने गौर किया होगा कि जब किसी बीमारी में होते हैं तो हमें स्वतः ही भूख नहीं लगती इसलिए ये बहुत जरूरी हो जाता है जब हमें अचानक भूख लगनी बंद हो जाये तो हमें अपने डॉक्टर से मिल लेना चाहिए।

  • गंभीर बीमारियां जैसे- कैंसर,लिवर की बीमारी,किडनी की बीमारी,दिल की बीमारी, अस्थमा,हेपेटाइटिस, HIV और कुछ थाइरॉइड की बीमारी।
  • कुछ अन्य तकलीफें जैसे- यूरिन का इंफेक्शन, सर्दी जुकाम, डाइबिटीज, पेट में एसिड का ज्यादा बनना भी भूख ना लगने के कारण हो सकते हैं।
  • अगर कोई महिला गर्भवती हो, पेट साफ ना हो रहा हो या उसे उल्टी आने का मन हो तो भी भूख नहीं लग सकती है।
  • कुछ दवाईयां जैसे- कीमोथेरेपी, पेनकिलर्स (दर्द की दवा), एंटीडिप्रेसेंट (तनाव कम करने वाली दवा)।

तनाव,थकान और डिप्रेसन भी मुख्य कारण होते है भूख ना लगने के। कुछ इमोशनल या मेन्टल कंडीशन के वजह से भी भूख नहीं लग सकती है।

*अगर आप अपनी बॉडी इमेज को लेकर गंभीर हैं और आप भूख लगने के बावजूद खुद से ही खाना नहीं खा रहें हैं या कम खा रहे हैं तो बेहतर होगा एक बार अपने डाईटीशियन या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

छोटे बच्चों और बड़ी उम्र के लोगों में भूख न लगना एक आम बात है। छोटे बच्चे हमेशा खाने को लेकर लापरवाही करते हैं और खाते समय उधम मचाते हैं इसलिए बच्चों में भूख कम लगती है जो नार्मल है। चिंता वाली बात तब हो जाती है जब बच्चों का वजन कम हो रहा हो या बच्चा पुरे दिन ही खाना खाने से मना कर रहा है।

भूख कैसे बढ़ाएं-

हम अपनी लाइफस्टाइल में कुछ परिवर्तन कर के भी भूख बढ़ा सकते हैं।

  • अपनी डाइट में से शुगर (चीनी) वाली ड्रिंक्स हटा कर।

सुक्रोज, जो सोडे में पाया जाने वाला चीनी का प्रकार है, आपको भरा हुआ महसूस कराता है। इस फैक्ट के अलावा कि सोडा वास्तव में आपके लिए खराब है, ये आपकी भूख को नियंत्रित करने वाले हॉर्मोन के साथ खिलवाड़ करता है। यदि आप स्वस्थ भूख को बनाये रखना चाहते हैं तो सोडा,मीठे रस और एनर्जी ड्रिंक से बचें।

शुगर से बनने वाले अन्य प्रकार जैसे फ्रुक्टोज़,ग्लूकोज़ आपके भूख वाले हॉर्मोन को कम नुकसान पहुंचाते हैं।

  • दिनभर के खाने को 4-6 बार थोड़ा-थोड़ा खा कर।

अगर आप दिन भर में 3 बार खाना खा रहे हैं तो आप महसूस करेंगे कि आपका पेट भरा सा है तो आप अपनी कैपिसिटी के हिसाब से कम ही खा पा रहे हैं। और यदि आप इसी खाने को 4-6 बार थोड़ा-थोड़ा कर के खा रहे हैं तो आप ज्यादा भी खा पाएंगे और आपका मेटाबोलिज्म भी सही रहेगा।

ग्रहलीन (Ghrelin) हॉर्मोन जो भूख को नियंत्रित करता है वो हर 4 घंटे में भूख लगाने का काम करता है इसलिए अगर आप हर 4 घंटे में कुछ न कुछ खा रहें हैं तो आपकी भूख बरकरार रहेगी।

नाश्ता बिल्कुल भी न छोड़े। नाश्ते में तब भी हल्का स्नैक ले लें इससे आपका मेटाबोलिज्म सही रहेगा और दिन भर भूख बनी रहेगी।

  • खाना खाते समय अपने को बिजी रखो।

खाना खाते समय अपना ध्यान कहीं दूसरी जगह लगा कर जैसे टी. वी., स्मार्टफोन, चैटिंग, दोस्तों से बात करने से आप अपने दिमाग को कहीं और लगाने लगते हैं और आप पेट भर के खाना भी खाते रहते हैं।

भूख बढ़ाने के लिए कौन सा विटामिन्स लेना चाहिए?

आप अपने डॉक्टर से जिंक, थियामिन, फिश ऑयल के बारे सलाह लें। ये सप्लीमेंट्स आपकी भूख बढ़ाने में मदद कर सकते हैं लेकिन एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरुर लें।

भूख बढ़ाने वाली दवाएं –

एलोपैथी या अंग्रेज़ी दवाएं तो हैं ही साथ ही कई प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं भी हैं। एलोपैथी में भूख बढ़ाने वाली दवाएं तो बहुत सी हैं जैसे मिरताजापिन,मेगेस्ट्रोल एसीटेट (mirtazapine, megestrol acetate),सिप्रोहेप्टादिन आदि जो कि बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं दी जाती। इन दवाओं के बहुत साइड इफेक्ट्स होते हैं।

  • तेज़ साइड इफेक्ट्स में जैसे मूड चेंज, खून का थक्का जमना आदि।

आयुर्वेदिक उपचार भी कर सकते हैं जैसे- धनिया, छोटी इलायची और काली मिर्च को समान मात्रा में पीसकर उसमें चौथाई चम्मच घी और चीनी मिला लें। इसके बाद इस मिश्रण को खाने से पहले खाएं, इससे आपकी भूख बढ़ जाएगा। भूख बढ़ाने के लिए छाछ का उपयोग भी कर सकते हैं। रोजाना छाछ का सेवन करने से पेट से जुडी समस्याएं खत्म हो जाती हैं और भूख बढ़ती है। आयुर्वेदिक दवा रेडीमेड भी आती हैं जैसे पतांजलि की लिव-अमृत, हिमालया की लिव-52.

PREGA NEWS क्या है?

Prega News card का पैकेट।

Prega news प्रेग्नेंसी चेक करने का कार्ड है जिसे कोई भी महिला घर बैठे 5 मिनट में आसानी से प्रेग्नेंसी का पता कर सकती है। ये सबसे सही और सेफ तरीका भी है क्योंकि ये आपके बॉडी को किसी भी प्रकार से इन्टरफेयर नहीं करता।

PREGA NEWS कैसे यूज़ करें?

  • सुबह की सबसे पहली यूरिन एक कंटेनर में लें।
  • Prega news के पैकेट में एक ड्रॉपर होगा जिससे यूरिन की तीन ड्रॉप Prega news कार्ड के गहरे छेद (जहाँ पर S लिखा है) में डालनी है।
  • अब 5 मिनट इंतजार कीजिये।
Prega News card

प्रेग्नेंसी कैसे जांचे – Prega news कार्ड के बीचों बीच दो पिंक लाइन हैं जिसमें C और T लिखा हुआ है। अब अगर T वाली लाइन हल्की पिंक हो जाती है तो इसका मतलब यूरीन में जो प्रेग्नेंसी हॉरमोन (hCG हॉरमोन) होता है उसकी कमी है और आपको फिर से अगली सुबह टेस्ट करना है।

पीरियड्स रुकने से 7 दिनों के अंदर ही सबसे सही समय होता है प्रेग्नेंसी चैक करने का। क्योंकि इसी समय यूरिन में प्रेग्नेंसी हॉरमोन पाया जाता है। पीरियड्स अगर बार-बार रुक जा रहें हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य ले लें।

अब अगर कार्ड की C लाइन पिंक हो जाती है तो भी ये टेस्ट मान्य नहीं होगा।

C और T लाइन दोनों एकसाथ पिंक हो जाती हैं तो इसका मतलब प्रेग्नेंसी पॉजिटिव है।

कुछ जरूरी बातें

  • Prega news यूज़ करने से पहले उसकी एक्सपायरी चैक कर लें।
  • अच्छे से रिजल्ट पाने के लिए कम से कम तीन बार अलग-अलग टेस्ट कार्ड का यूज़ करें।
  • एक टेस्ट कार्ड केवल एक बार यूज़ होता है।
  • पहला पीरियड बंद होने के सात दिनों के अंदर टेस्ट करें।
  • घबराएं नहीं, आराम से एक जगह बैठ कर टेस्ट करें और इंतज़ार करें।
  • ज्यादा कंफ्यूजन हो या पीरियड लंबे समय तक बंद हों और टेस्ट भी नेगेटिव आये तो फिर अपने डॉक्टर से सलाह लें।

होप की आपको सारी जानकारियां मिल गयी होंगी अगर फिर भी कोई डाउट है तो संपर्क कर सकते हैं, धन्यवाद।

Revital-H capsule के बारे में पूरी जानकारी।

Revital-H Men’s

दोस्तों Revital-H पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए आती है। लेकिन आज हम Revital-H Men’s की बात करेंगे।

Revital-H Men’s की पैकिंग – Revital-H, जो पुरुषों के लिए आता है वो कैप्सूल फॉर्म में होगा और 10cap., 30cap.,60cap. की पैकिंग में मिलता है।

जबकि Revital-H, महिलाओं वाली टेबलेट फॉर्म में आती है।

Revital-H कैप्सूल में विटामिन और मिनरल का ऐसा मिश्रण है जो हमारे शरीर की रोजाना जरूरतें पूरी करता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण जिन्सेंग है जो हमारे शरीर में ऑक्सिजन सप्लाई और एकाग्रता बढ़ाता है, शरीर में दिनभर की होने वाली थकान को मिटाने में मदद भी करता है।

Revital-H कैप्सूल के मुख्य घटक-

Revital-H कैप्सूल के फायदे –

  • शरीर के नर्वस सिस्टम को सामान्य बनाये रखने में मदद करता है।
  • दिमागी सतर्कता और एकाग्रता को प्रभावी रूप से मजबूत बनाता है।
  • आदमी को मानसिक रूप से मजबूत और सतर्क बनाने में मदद करता है।
  • लाल रक्त कणिकाओं को बनाने में मदद करता है।
  • रोजाना के मानसिक तनाव और शारीरिक थकान दूर करने में मदद करता है।

Revital-H कैप्सूल कैसे लें?

  • एक वयस्क आदमी रोज़ एक कैप्सूल नाश्ते के बाद पानी/दूध या जूस के साथ लें।
  • अगर लगातार 3 महीनों तक कैप्सूल खा रहे हैं तो बीच में 15 दिन का गैप अवश्य लें या अपने डॉक्टर की सलाह लें।

Revital-H कैप्सूल के नुकसान –

  • Revital-H कैप्सूल में पाए जाने वाले पोलयोल्स (polyols) के कारण किसी-किसी व्यक्ति को पेट चलने की समस्या हो सकती है।
  • Revital-H कैप्सूल की ज्यादा मात्रा आपके पेट में जलन और सरदर्द कर सकती है।
  • Revital-H कैप्सूल किसी-किसी व्यक्ति के हार्ट रेट बढ़ा सकती है।
  • Revital-H कैप्सूल का बाहरी आवरण मांसाहारी पदार्थ (Gelatin) से बना होता है इसमें लाल रंग का नॉन-वेज लोगो भी बना हुआ है इसलिए जो लोग शुद्ध शाकाहारी हैं वो कृपया सतर्क रहिये।

कुछ अन्य जरूरी बातें –

  • Revital-H कैप्सूल को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  • रोज़ एक कैप्सूल से ज्यादा ना लें।
  • Revital-H कैप्सूल को धूप से दूर रखें हो सके तो ऐसी जगह रखें जहां तापमान सामान्य हो और धूप डायरेक्ट ना पड़ती हो।
  • ज्यादा दिक्कत होने पर या कंफ्यूज़न की स्थिति में अपने डॉक्टर से सलाह ले लें।
  • Revital-H कैप्सूल लेने से पहले उसकी एक्सपायरी अवश्य चैक कर लें।

LIV.52 टॉनिक क्या है?

दोस्तों LIV.52 लिवर के लिए एक आयुर्वेदिक दवा है जिसे हिमालया कंपनी द्वारा 1955 में लांच किया गया। LIV.52 टॉनिक सभी उम्र के लोगों के लिए बनाई गई है। छोटे बच्चों के लिए ये टॉनिक ड्रॉपर की पैकिंग में आती है(60ml और 100ml) और बड़ों के लिए LIV.52 टॉनिक सिरप की पैकिंग में आती है( 200ml और 100ml)। एक LIV.52 DS टॉनिक भी आती है(200ml और 100ml ) । LIV.52 DS टॉनिक LIV.52 टॉनिक से डबल पॉवर में होती है।

LIV.52 के टेबलेट फॉर्म और कैप्सूल भी आते हैं जिसके बारे में हम बाद में जानेंगे।

LIV.52 टॉनिक के मुख्य फायदे

  • पीलिया के इलाज में मदद करता है।
  • खाना पचाने में मदद करता है।
  • भूख बढ़ाता है।
  • लिवर की सूजन कम करता है।
  • वायरल हेपेटाइटिस को होने से रोकने में मदद करता है।
  • अल्कोहोलिक लिवर को सही करने में मदद करता है।
  • लिवर के एंजाइम कम करने में मदद करता है।

भूख में सुधार: एनोरेक्सिया में और अधिकतम वृद्धि और वजन वृद्धि से कम में, Liv.52 टॉनिक बुनियादी भूख-तृप्ति लय को सामान्य बनाता है। यह गर्भावस्था के दौरान भूख न लगने की स्थिति को भी दूर करता है। एक दैनिक स्वास्थ्य पूरक के रूप में, Liv.52 टॉनिक भूख, पाचन और अनुकूलता प्रक्रियाओं में सुधार और वजन वृद्धि को बढ़ावा देता है।

हेपेटोप्रोटेक्टिव एक्शन: Liv.52 टॉनिक में प्राकृतिक सामग्री रासायनिक रूप से प्रेरित हेपेटोटॉक्सिसिटी के खिलाफ शक्तिशाली हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण प्रदर्शित करती है। यह हेपेटिक पैरानचिमा की रक्षा करके और हेपेटोसेलुलर उत्पादन को बढ़ावा देकर लिवर की कार्यात्मक दक्षता को पुनर्स्थापित करता है। Liv.52 टॉनिक की एंटीपेरोक्सिडेटिव गतिविधि कोशिका झिल्ली की कार्यात्मक अखंडता को होने वाले नुकसान को रोकती है, साइटोक्रोम P-450 (एंजाइमों का एक बड़ा और व्यापक समूह, जो कार्बनिक पदार्थों के ऑक्सीकरण को उत्प्रेरक करता है), रिकवरी अवधि को तेज करता है और संक्रमित हेपेटाइटिस में हेपेटिक कार्यों की शीघ्र बहाली सुनिश्चित करता है। यह एसीटलडिहाइड (इथेनॉल के ऑक्सीकरण द्वारा उत्पादित है जो लोकप्रिय रूप से हैंगओवर का कारण माना जाता है) का तेजी से उन्मूलन करता है और अल्कोहल प्रेरित हेपेटिक क्षति से सुरक्षा सुनिश्चित करता है। Liv.52 टॉनिक पुराने अल्कोहलिज्म में लिपोट्रोपिक (यौगिकों जो वसा के टूटने को प्रेरित करने में मदद करते हैं) को भी कम करते हैं और लिवर की फैटी समावेश को रोकते हैं। प्री-सिरोटिक की स्थिति में, Liv.52 टॉनिक सिरोसिस की प्रगति को रोकता है और आगे लिवर की क्षति को रोकता है।

LIV.52 टॉनिक के मुख्य तत्व

  • हिमसरा
  • कासनी
  • अर्जुन
  • काकामाची
  • कासमर्द
  • बिरंजसिफ़ा
  • झावुक

हिमसरा (केपर बुश) – कैपर बुश (हिमसरा) एक शक्तिशाली हेपेटोप्रोटेक्टिव है। यह प्लाज्मा और हेपेटिक कोशिकाओं में मैलोनडिएल्डिहाइड (ऑक्सीडेटिव तनाव के लिए बायोमार्कर) के स्तर की वृद्धि को रोकता है। कैपर बुश ALT और AST एंजाइम के स्तर को रोकता है और लिवर की कार्यात्मक दक्षता में सुधार करता है। साथ ही, कैपर बुश में मौजूद फ्लेवोनॉइड महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट गुणों का प्रदर्शन करते हैं।

कासनी – कासनी (चिकोरी) शराब विषाक्तता के खिलाफ लिवर की रक्षा करता है। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी है, जिसे इसकी फ्री रैडिकल सफाई गुण के रूप मेंं देखा जा सकता है और इसमें हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद रहता है।

LIV.52 टॉनिक कैसे लें –

बच्चों को – 1 चम्मच (5ml) दिन में दो से तीन बार रोजाना । बड़ों को – 2 चम्मच (10ml) दिन में दो से तीन बार रोजाना। या फिर डॉक्टर के कहे अनुसार।

टॉनिक लेने से पहले उसे अच्छे से हिला लें।

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