

दशमूलारिष्ट एक आयुर्वेदिक टॉनिक है जो कई कंपनियों द्वारा मार्केट में उपलब्ध हैं और सभी एक ही फॉर्मूले पर आधारित हैं। इसलिए आप कोई भी दशमूलारिष्ट ले सकते हैं। दशमूलारिष्ट टॉनिक परिवार के सभी जनों को दी जा सकती है। ये टॉनिक मुख्य रुप से दिन प्रतिदिन की सुस्ती, सामान्य कमजोरी, थकान से उबरने के लिए एक पोषण टॉनिक है।दशमूलारिष्ट टॉनिक खराब पाचन में सुधार करता है और सभी प्रकार के संक्रमण (इंफेक्शन) के खिलाफ प्रतिरक्षा (immunity) को बढ़ाता है। दशमूलारिष्ट टॉनिक में 5 से 7 प्रतिशत तक अल्कोहॉल (सेल्फ जनरेटिंग अल्कोहॉल) की मात्रा होती है।
दशमूलारिष्ट टॉनिक के फायदे –
दशमूलारिष्ट टॉनिक महिलाओ के लिए बहुत गुणकारी मानी जाती है। दशमूलारिष्ट हमारे शरीर के बहुत से विकारो को दूर करती है और हमारे शरीर में नई सी जान देती है। दशमूलारिष्ट टॉनिक के महत्वपूर्ण लाभ एवं प्रयोग निम्नलिखित हैं:
प्रसूता स्त्रियों के लिए दशमूलारिष्ट के लाभ –
दशमूलारिष्ट टॉनिक में प्रयोग किए गए तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमताओं को बढ़ाती है। जब कोई स्त्री शिशु को जन्म देने के बाद दशमूलारिष्ट का सेवन करती है तो वह कई रोगों का शिकार होने से बच जाती है। क्योंकि इसमें उपयोग किए गए तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इसका सेवन आम का पाचन करता है जिस से ज्वर, जीर्णज्वर, आम सम्बंधित बीमारियां नहीं होती है (पाचनतंत्र दुरुस्त न होने से भोजन अधपचा रह जाता है जिसे ‘आम’ कहते हैं), यह प्रसूता के कास और श्वास में भी काफी लाभदायक है। इसमें उपयुक्त तत्व शरीर में प्रसव के बाद आने वाली निर्बलता को दूर करते हैं।
गर्भपात और गर्भस्राव होने में में दशमूलारिष्ट टॉनिक का उपयोग –
स्त्रियों में गर्भाशय की शिथिलता गर्भपात अथवा गर्भस्त्राव का कारण बनता है। गर्भाशय की शिथिलता को दूर करने के लिए दशमूलारिष्ट टॉनिक एक उतकृष्ट औषधि है। इस औषधि में जिन तत्वों का उपयोग होता है वह स्त्री के गर्भाशय को ताकत देते हैं। यह बार-बार होने वाले गर्भस्त्राव का इलाज करता है साथ ही एक स्वस्थ संतान की प्राप्ति भी होती है। यदि किसी भी स्त्री को ऐसी कोई भी समस्या है तो इस औषधि का प्रयोग कम से कम 3 महीने तक करना चाहिए। साथ ही संतान प्राप्ति के प्रयास भी करते रहने चाहिए।
पूयशुक्र बीमारी (pus cells in semen) में दशमूलारिष्ट टॉनिक का उपयोग –
दशमूलारिष्ट टॉनिक एक ऐसी औषधि है जिसमें शुक्र शोधक पाया जाता है। इस औषधि का उपयोग रौप्य भस्म और त्रिफला चूर्ण के साथ सेवन करने से शुक्रशुद्धि होती है। साथ ही वीर्य (स्पर्म) में आ रही पस सेल्स को भी कम करता है।
दर्द निवारक (painkiller) और शोथहर (anti inflammatory) में दशमूलारिष्ट टॉनिक का उपयोग –
दशमूलारिष्ट टॉनिक के सेवन से वात का शमन होता है। इसमें कुछ तत्व ऐसे होते हैं जो दर्द निवारक होते हैं। इसी कारण इस औषधि का उपयोग दर्द से निवारण करने में होता है। यह स्त्रियों में होने वाली पीठ दर्द, गर्भाशय के दर्द, और पेट के दर्द का उपचार करने में सहायक होती है।
पाचन क्रिया को सुधारने में दशमूलारिष्ट टॉनिक के उपयोग –
दशमूलारिष्ट टॉनिक का सेवन करने से शरीर की पाचन क्रिया पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। यदि आपका पाचन तंत्र सही नहीं है तो ऐसे में यह शरीर को कई बीमारियों के लिए न्यौता देता है और बीमारियों का घर बन जाता है। ऐसे में दशमूलारिष्ट टॉनिक का उपयोग करने से पाचन तंत्र सही रहता है जिससे आप कई बीमारियों का शिकार होने से बच सकते हैं।
अन्य उपयोग –
- शारीरिक-मानसिक रूप से मजबूत बनाने में दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
- बढ़ती उम्र को रोकन में दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
- स्टेमिना बढ़ाने में दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
- त्वचा के लिए दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
- श्वास रोग में दशमूलारिष्ट के उपयोग ।
दशमूलारिष्ट टॉनिक का सेवन और मात्रा विधि।
बच्चे- 5 से 10 ml
वयस्क- 10 से 25 ml
सेवन-
दवा लेने का उचित समय- सुबह और रात में भोजन के बाद
दिन में कितनी बार लें? 2 बार
किसके साथ लें? बराबर मात्रा में गुनगुना पानी मिला कर
कितने समय के लिए लें?चिकित्सक की सलाह से।
